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रोमेंटिक पति और अनरोमैंटिक पत्नी

रोमेंटिक पति और अनरोमैंटिक पत्नी :शादी के चार साल बाद रिया और अवि हिल स्टेशन घूमने गए, लेकिन वहां जो हुआ उसने जिंदगी बदल दी। 

रिया आज बहुत खुश थी। फाइनली उसका अपने ड्रीम डेस्टिनेशन पर घूमने जाने का प्लान बन ही गया। शादी के चार साल बाद पहली बार वह पूरे पांच दिन की छुट्टियों पर बाहर जा रहे थे। इससे पहले जब भी बाहर घूमने का प्लान बना, किसी न किसी कारण से कैंसिल हो गया। अपने स्वभाव के मुताबिक रिया ने सारी तैयारियां कर ली। सब कुछ प्लान करके करना और हर काम को परफेक्शन के साथ अंजाम देना रिया की आदत थी।

फर्स्ट एड किट ले आए?” अवि के घर में घुसते ही रिया ने पूछा।

“मैं तो भूल ही गया” अवि ने आदत के मुताबिक उत्तर दिया।


रिया को गुस्सा आ गया। “सारी तैयारियां मैंने की। बुकिंग से लेकर टूरिस्ट गाइड से लेकर हर चीज। एक काम तुम्हें सौंपा था। क्या करूं तुम्हारी इस अलमस्त आदत का।” वह कुढ़ गई।

लेकिन अवि गुस्सा नहीं हुआ। प्यार से उसे बाहों में भरता हुआ बोला, “अलमस्त रहना मेरा स्वभाव है। क्या करूं? वैसे मैं हूं ना! मैं तुम्हें कोई चोट ही नहीं लगने दूंगा।”

रिया ने उसकी बाहें झटकते हुए कहा, “चोट लगना न लगना एक बात है और प्लानिंग अलग। तुम इतने लापरवाह कैसे हो सकते हो?”

अब अवि  को भी थोड़ा गुस्सा आ गया, फिर भी उसने अपनी बाहें रिया के गले में दोबारा डालते हुए बात खत्म की, “रास्ते में ही मेडिकल शॉप पड़ती है। वहां से किट लेना याद रखना मेरी जिम्मेदारी। अब जल्दी सो जाएं? सुबह जल्दी उठना है।”

थोड़ी देर प्यार जताने के बाद अवि सो गया, मगर रिया की आंखों में नींद नहीं थी। उसे आज शादी के चार साल बाद भी जब तब लगने लगता कि शायद उसने अवि  से शादी करके गलती कर दी है। रिया ने अपनी प्लानिंग के मुताबिक मनपसंद पोस्ट तक पहुंचने के बाद शादी के लिए लड़के देखना शुरू किया था। मम्मी पापा के ढूंढ़े रिश्तो में से कोई भी उसे पसंद नहीं था। शादी वाली ऐप्स से भी उसकी जिंदगी में ऐसा कोई नहीं आया जिससे उसे लगे कि उसे प्यार हो गया है।

और तब मिला अवि । रिया को अवि में कोई भी कमी नजर नहीं आई।

आखिर उसे मम्मी पापा की बात सही लगने लगी कि प्यार होते होते हो जाएगा। चलो, अगर लड़का ठीक लग रहा है तो शादी कर ही लेते हैं।

मगर शादी के बाद जब उसने पाया कि वह जितनी परफेक्शनिस्ट है अवि  उतना ही अल्हड़। वह जितनी संजीदा है अवि  उतना ही केयरलेस। उसे अवि का स्वभाव बिल्कुल पसंद नहीं आता, लेकिन उसे अपनी लीडरशिप पर पूरा भरोसा था। बचपन से सुनती आई थी कि उसमें कुछ ऐसी प्रतिभा है कि वह जो चाहती है दूसरों से करवा ही लेती है। मगर बहुत कोशिशों के बावजूद अवि को रिया अपने रंग में ढाल नहीं पाई। उसे अक्सर अवि  के अलमस्त अंदाज पर झल्लाहट आ जाती।

तराई के उस एयरपोर्ट पर उतरते ही अगली दिक्कत सामने आ गई। रिया ने जो टैक्सी बुक कराई थी वह टैक्सी ड्राइवर फोन ही नहीं उठा रहा था। जब दूसरे टैक्सी ड्राइवर्स से पूछा तो समस्या सामने आई। बाहर मूसलाधार बारिश हो रही थी यह तो रिया ने देख लिया था। लेकिन मूसलाधार बारिश में कोई भी टैक्सी हिल स्टेशन जाने को तैयार नहीं थी, क्योंकि रास्ते में स्लिप होने का खतरा था।

अब रिया ने प्रश्नवाचक दृष्टि से अवि की ओर देखा। अवि की आवाज रुमानी हो गई- “देखो कितनी सुंदर जगह है। यहां से बाहर का कितना खूबसूरत मौसम दिख रहा है। बाहर मूसलाधार बारिश हो रही है। प्रेमी बादल अपनी प्रेमिका धरती की प्यास बुझाने को आतुर है,” कहते हुए अवि ने रिया को बाहों में लेना चाहा।

“कैसुअल्टी की भी हद होती है अवि !” रिया को फिर से गुस्सा आ गया, “आज का दिन वेस्ट हो गया तो हम लोगों का पूरा शेड्यूल गड़बड़ा जाएगा। इस बात की तरफ तुम्हारा ध्यान नहीं जा रहा?”

अब शांति पसंद अवि  को भी गुस्सा आ गया। “यह बारिश मैंने तो नहीं करवाई है और जब हो ही रही है तो क्या इसे एंजॉय करना सही सलाह नहीं है? जो शेड्यूल आगे गड़बड़ाएगा उसकी परवाह में आज भी टेंशन में बैठे रहना कहां की अकल मंदी है?”

“पर हम लोगों को यहां पर कोई गेस्ट हाउस बुक कराना पड़ेगा आज के लिए। या यहीं बैठे रहेंगे सारी रात मूसलाधार बारिश देखते हुए।” रिया थोड़ा नम्र हुई।

अवि  उठकर कहीं चला गया। थोड़ी देर बाद आया तो बोला यहां नेटवर्क नहीं आ रहा था इसलिए थोड़ा बाहर की तरफ चला गया था। नेटवर्क देखने के चक्कर में भीग गया हूं। मैंने यहां पास ही एक गेस्ट हाउस बुक करा लिया है।”

गेस्ट हाउस पहुंचकर अविने भीगे कपड़ों में ही रिया पर चुंबनों की बरसात शुरू कर दी। रिया को फिर गुस्सा आ गया। जितने दिनों की जर्नी थी उसने उतने सेट कपड़े रखे थे। आज के लिए कोई एक्स्ट्रा कपड़े नहीं रखे थे। “छोड़ो मुझे, तुम मेरे भी कपड़े भिगो दोगे और मुझे एक-एक सेट तुम्हारे और अपने कपड़े धोने पड़ेंगे।”

“बस, इतनी सी बात! अगर ऐसा है तो चलो छत पर दोनों आराम से भीगते हैं, एक-एक सेट कपड़े धोने की जिम्मेदारी मेरी,” कहते हुए अवि ने उसे गोद में उठा लिया।

रिया मना नहीं कर पाई। आखिर अवि  की मद भरी बाहों में धीरे-धीरे उसकी पूरी नाराजगी धुल गई। नाराजगी धोने के लिए बारिश भी तो झमाझम बरस रही थी।

लेकिन असली टेंशन तो हिल स्टेशन पहुंचने के बाद शुरू हुई। कल झमाझम बारिश हुई थी और पहाड़ों पर ढेर सारी बर्फ गिरी थी। बर्फ गिरने की वजह से सारे रास्ते बंद हो चुके थे। जितनी भी जगह जाने का प्लान बनाया था, बुकिंग कराई थी, टिकट ली थी, उनमें से किसी जगह वह नहीं जा सकते थे।

रिया का मूड बुरी तरह ऑफ था। तभी अवि ने प्यार से उसका हाथ अपने हाथों में लिया। अभी से क्यों टेंशन लेती हो। एक दिन तो तुम्हारे शेड्यूल में लोकल घूमने का था। तो फिर आज हम लोग लोकल ही घूमते हैं। कल की कल देखेंगे।”

लोकल घूमते हुए भी रिया का दिमाग चल रहा था। शाम को वह लैपटॉप लेकर बैठ गई। “अवि हम अपनी छुट्टियां कैंसिल कर देते हैं। अगर फ्लाइट मिल जाती है कल की तो हम लोग कल वापस चले चलते हैं। आखिर इतनी छुट्टियां वेस्ट क्यों करनी हैं। यही छुट्टियां किसी और चीज में काम आएंगी।”

पर अवि ने साफ मना कर दिया। रिया को धक्का सा लगा। इन चार सालों में भले ही अवि अपने हिसाब से जीता रहा हो, लेकिन रिया की कोई भी बात उसने इस तरीके से नहीं काटी थी। जो वह कहती अवि मान ही लेता था। रिया के गुस्से का ठिकाना नहीं रहा, वह मुंह फेर कर सो गई।

सुबह नींद खुली तो वह अवि की बाहों में थी। शायद रात में ठंड लग रही होगी। रजाई पतली थी इसलिए अवि ने उसे बाहों में समेट लिया था। उसके जागते ही अवि ने उसके माथे पर एक प्यारा सा चुंबन अंकित कर दिया। फिर होठों पर चुंबन देने के बाद वह बहुत ही मद भरी आवाज में बोला “गुड मॉर्निंग!”


रिया का गुस्सा काफी हद तक दूर हो गया था। “आई एम सॉरी अवि! कल मैंने शायद तुमसे कुछ ज्यादा ही तल्खी से बोल दिया।”

“सॉरी के लिए थैंक यू। मैं भी तुमसे एक बात कहना चाहता हूं। अब तुम बाकी के दिन खुद को अपने इस टूरिस्ट ऑर्गनाइजर पर छोड़ दो। यकीन मानो, मेरी कायल हो जाओगी।” अवि ने कुछ ऐसे अंदाज में कहा कि रिया हंस पड़ी।


“तो सुनो आज का प्लान, आज हम टहलने चल रहे हैं।”

“कहां?”

“प्यार के रास्ते पर, जो इस खादिम ने बनवाया है अपनी प्रिटी क्वीन के लिए।”

रिया मुस्कुरा दी।

करने को और कुछ नहीं था। कहीं जाने की जल्दी नहीं थी। रास्ता सच में बहुत खूबसूरत था। हवा की सिहरन गुदगुदा रही थी और अवि ने उसे बांहों में समेटा हुआ था।

तभी एक बहुत ही सुंदर चिड़िया सामने की सड़क पर आ बैठी और प्यारी सी आवाज निकालने लगी।

“रुको-रुको, बिल्कुल हलचल न करो। वो अपने साथी को बुला रही है। फिर तुम इनका प्यार देखना।”

“तुम्हें कैसे पता?”

इतने में सच में चिड़िया आ गया और दोनों चोंच में चोंच मिलाकर प्यार करने लगे। उनका प्यार देखकर अवि की भी उमंगें बेकाबू हो गईं। उसने एक नजर असपास की सुनसान सड़क पर डाली और रिया के होंठों को अपने होंठों में ले लिया।

रिया के मन में शर्म, खुशी, थोड़ी सकपकाहट, किसी के आ जाने के डर के साथ कई खट्टे-मीठे भाव हिलोरे मारने लगे।

“पता है, जब पहली बार मैंने फिल्म में किसिंग सीन देखा था...” उसके बाद तो चहककर जो बातें शुरू हुईं तो मन की परतें खुलती चली गईं।

तभी अवि ने सामने की तरफ इशारा किया। रिया ने उधर देखा- स्वप्न लोक सी सुंदर घाटी और उसके पार सुंदर बर्फ की पहाड़ियां उसके सामने बिखरी थीं। उसे सब समझ आ गया। कल जब वो लोग यहां आए थे तो कुहरे से सब ढका था। गाइड ने बताया था कि सुबह सूर्योदय के समय यूज़ुअली कुहरा नहीं होता। गेस्ट हाउस से पैदल रास्ते के बारे में भी वो बता रहा था, जिसे अवि शिद्दत से समझ रहा था।


तो अवि इसीलिए उसे सुबह-सुबह यहां लाया है। रिया अभिभूत हो गई।

“तुम्हारे चेहरे पर खुशी देखकर बहुत खुशी हुई।” अवि भावुक होते हुए बोला।

“ओ अवि, थैंक यू!” रिया ने खुश होकर उसकी बाहों में बाहें डाल दीं।

सिर्फ ये सीन दिखाने के लिए नहीं, बल्कि मेरे मन पर छाया कुहासा हटाने के लिए भी। आज मन से टेंशन, प्लानिंग, लीडरशिप का कुहासा हटाया तो हमारे मन मिले। तुम्हारा इस घाटी सा विस्तृत प्यार देख पाई मैं। आज मेरा बचकानी फिल्मों की तरह चिल्लाने का मन हो रहा है।”

“नहीं, ये बचपना हम साथ में करेंगे।”

“आई लव यू..!” दोनों चिल्ला रहे थे, खिलखिला रहे थे और उनकी खिलखिलाहट की ईको घाटी से टकराकर वापस आ रही थी।



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