#मुरिया विद्रोह (1876
ईस्वी)
शासक:
मुरीया विद्रोह के समय बस्तर का शासक भैरमदेव था ,1876 ईस्वी में यह विद्रोह हुआ था।
नेतृत्व:
इस मुरीया विद्रोह का नेत्तृत्व झाड़ा सिरहा ने किया था ।
प्रतीक:
इस विद्रोह की प्रतीक आम वृक्ष की टहनी था।
कारण:
•भू राजस्व के नियम कानून में अंग्रेजो ने परिवर्तन किया था।
•गोपीनाथ कपड़दार दीवान ने आदिवासियो पर गोली चला दिया था , आदिवासियो में भय और क्रोध का मौहल्ल था।
•राजा के निजी जीवन पर अंग्रेजो का हस्तक्षेप हो गया था, राजा को प्रिंस ऑफ़ वेल के स्वागत के लिए मुंबई जाना था लेकीन आदिवासी नहीं चाहते थे कि राजा जाए (गोपीनाथ के भय से)।
• बेगारी प्रथा और मांझीयो के अधिकारों में कमी।
2 मार्च 1876 को काला दिवस मनाया जाता हैं।
दमनकर्ता/परिणाम:
8 मार्च 1876 में मुरीया दरबार का आयोजन किया गया था।
इस विद्रोह का दमन मैक जार्ज ने किया था, ये विद्रोह सफल नहीं हुआ था क्यूंकि राजा ने आदिवासियो का ज्यादा साथ नहीं दिया था।
#भूमकाल विद्रोह (1910
ईस्वी):
भूमकाल का विद्रोह भूमि का हिलना होता है।
शासक:
भूमकाल विद्रोह के समय बस्तर का राजा रुद्रप्रताप देव थे ।
नेत्तृत्व:
भूमकाल विद्रोह का नेत्तृत्व गुण्डाधुर ( नेतानार नामक गांव के नेता) के द्वारा किया गया था।
बैजनाथ पंडा को अंग्रेजो ने दीवान बनाया था, क्योंकि अंग्रेज की बाते बैजनाथ माना करता था जबकि गुण्डाधुर को दीवान बनाया जाना चाइए था लेकीन उसको नहीं बनाया गया था। क्योंकि गुण्डाधुर राजवंश का था लेकीन अंग्रेजो को वो पसंद नही था।
कारण:
• लाल कालेंद्र सिंह और राजमाता सुवर्ण कुंवर देवी की उपेक्षा किया गया था।
•आदिवासी जो घरेलू मंदिरा बनाते थे उसमें अंग्रेज ने पाबंदी लगा दिया।
•बेगारी प्रथा का विरोध।
• कर वृद्धि के विरोध में।
•बस्तर में बाहरी प्रवेश का विरोध
•अंग्रजों की नई शिक्षा नीति का विरोध।
•पुलिस कर्मचारियों का आदिवासियो पर अत्याचार।
• ईसाई मिशनरियों द्वारा धर्म परिवर्तन के खिलाफ।
इस विद्रोह का भी एक नारा था
नारा:
बस्तर आदिवासियो का है।
प्रतीक:
लाल मिर्च, मिट्टी के ढेले, धनुष बाण, भाले,आम की टहनियां आदि।
घटनाएं:
• लाल कालेंद्र सिंह और राजमाता सुवर्ण कुंवर देवी ने आदिवासियो को विद्रोह के लिए प्रेरित किया और आदिवासियो का एक नेता चुना।
• 1 फरवरी 1910 को विभिन्न बाजारों को लुटा गया ।
जैसे पुष्पाल बाजार, करंजी बाजार।
•4 फरवरी को कुकानार बाज़ार में एक व्यापारी को मार दिया गया।
• 29 मार्च 1910 को विद्रोह का अंत हो गया।
दमनकर्ता/ परीणम:
पॉलिटिकल एजेंट T ब्रेट और सुप्रीम कमांडर गेयर ने इस विद्रोह का दमन किया।
आदिवासियो का यह विद्रोह भी सफल नही हो पाया क्योंकि राजा का सहयोग नहीं मिल पाया।




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