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इंटर कास्ट मैरिज

इंटर कास्ट मैरिज

:निरवी को उसके भाइयों के चंगुल से छुड़ाने में अमल को इतना समय लग गया कि बहुत कुछ पीछे छूट गया

निरवी, ये हमारा लास्ट पेपर है। इसके बाद कॉलेज बंद हो जाएगा और हमारे मिलने का जरिया भी। तुम जानती हो ना यह बात?"

“और तुम भी यह जानते हो न अमल कि यह बात कहीं आगे नहीं बढ़ने वाली। कब से तुम्हें समझा रही हूं, क्यों तुम्हें समझ में नहीं आता, यह इंडिया है। यहां शादी दो लोगों के बीच नहीं, दो परिवारों के बीच भी नहीं, दो खानदानों के बीच होती है। एक ही कास्ट में इतनी ऊंच-नीच हो जाती है, तो फिर दूसरी कास्ट की तो बात ही मत सोचो। कोई रोटी-बेटी का संबंध नहीं करता। रोटी का तो ठीक, बेटी का बिल्कुल नहीं, कितने ही प्रोग्रेसिव, लिबरल हो जाओ, जाति तो जाती नहीं है।”

"लेकिन तुम्हारे बाबा तो ऐसे नहीं हैं न। तुम तो पापा की परी हो, सचमुच की परी।"

"पापा की परियां तभी तक परियां रहती हैं, जब तक वे अपनी पसंद से शादी न करें और करें तो अपनी ही कास्ट में करें। नहीं तो डायन बन जाती हैं, जिन्हें मार देने से पाप नहीं लगता बल्कि पापों का प्रायश्चित हो जाता है, खानदान की इज्जत बच जाती है।”

लेकिन कोशिश करने में क्या हर्ज है। मुझे पूरी उम्मीद है कि मैं अपने पेरेंट्स को मना लूंगा, पर मुझे तुम्हारे बाबा से बात करने की परमिशन दे दो निरवी प्लीज। मैं तुम्हारे बिना नहीं रह सकता।" अमल की आवाज में इल्तिजा थी।


"अमल, मैं पहले भी कह चुकी हूं कि मैं अपने बाबा के खिलाफ नहीं जा सकती। तुम जिद मत करो।" निरवी ने दांत भींचे।

"क्या तुम मुझसे प्यार नहीं करतीं?"

"करती हूं। बेहद करती हूं। अपनी जान से ज्यादा करती हूं। तुम्हारे लिए जान भी दे सकती हूं। पर क्या तुम यही चाहते हो? अगर यही चाहते हो तो ठीक है, मैं अभी इसी टेरेस से नीचे कूद जाती हूं। मामला ही खत्म।"

“ओफ्फोह निरवी। हम लॉ स्टूडेंट्स हैं। हम ही ऐसी फिजूल बातें करने लगे तो कैसे काम चलेगा बताओ? मैं कुछ नहीं जानता, मैं बिना कोशिश किए हार नहीं मानूंगा। मैं तुम पर कभी गिव अप नहीं करूंगा, यह मेरा वादा है।"

"तुम्हारे पेरेंट्स ने तुम्हारे लिए श्रेया को पसंद किया है। अमल, अगर तुमने श्रेया को नहीं अपनाया तो मैं सच में अपनी जान दे दूंगी। बेहतर यही है कि तुम भी अपने घरवालों की पसंद से शादी करो और मैं भी। हर प्यार की मंजिल शादी नहीं होती, यह बात हम लोग बहुत पहले से जानते थे।" निरवी की आवाज में थकान उतर आई।

"ठीक है, शादी में जरूर आना," कहता हुआ अमल लंबे-लंबे डग भरता हुआ दूर निकल गया और निरवी, जो अब तक अपने आंसू रोके हुए थी, उसे ओझल होने तक देखती रही, फिर वहीं घुटनों में सिर दिए फूट-फूट कर रो दी।


निरवी दो भाइयों की इकलौती बहन थी, जिसे उसके बाबा ने बहुत नाज़ों से पाला था। उसकी कोई फरमाइश ऐसी नहीं थी, जो अधूरी रही हो। इसीलिए उस गांव से निकलकर, जहां औरतें घर की देहलीज से बाहर कदम नहीं रखती हैं, घर में भी दो हाथ लंबा घूंघट लिए रहती हैं, निरवी को घर से कई किलोमीटर दूर शहर पढ़ने भेजा गया था, वह भी लॉ की पढ़ाई।

वकालत का पेशा वैसे ही लड़कियों के लिए सही नहीं समझा जाता, लेकिन निरवी हमेशा की बागी रही। और बचपन में ही मां के गुजर जाने की वजह से उसे हमेशा स्पेशल अटेंशन मिली। वह अपने बाबा की लाडली थी और वे इस बात को समझते थे कि इतने लंबे-चौड़े बिजनेस अंपायर के लीगल आस्पेक्ट देखने को घर की वकील से बेहतर और कौन होगा।

लेकिन कितनी ही आजादी सही, उसे पता था कि उसके बाबा कभी खानदान से बाहर किसी और से उसकी शादी नहीं करेंगे। फिर किसी दूसरी जाति में शादी की बात तो सोचना भी गुनाह था।

एग्जाम खत्म हो गए थे। अब रिजल्ट का इंतजार और इंटर्नशिप के लिए अप्लाई करने से पहले का वक्त काटे नहीं कट रहा था। बार-बार अमल के बारे में सोच कर आंखें भर आती थीं, पर घर में किसी से कुछ कह भी नहीं सकती थी। दोनों भाई अपनी दुनिया में मस्त रहते। कई-कई दिन घर नहीं आते। उनकी चिंता में बाबा की तबीयत खराब रहने लगी थी। इतनी लंबी-चौड़ी प्रॉपर्टी, पैसे की बारिश देखकर भाइयों का दिमाग खराब हो चुका था। बिजनेस छोड़कर अय्याशियों में डूब चुके थे।


पर निरवी को किसी से कोई मतलब नहीं रह गया था। थोड़े वक्त अपने बाबा के पास बैठती, जबरदस्ती हंसने-मुस्कुराने की कोशिश करती, कोई किताब या अखबार पढ़कर सुनाती, फिर अपने कमरे में बंद हो जाती।


तभी खबर मिली कि उसका भाई स्मगलिंग के चक्कर में दुबई एयरपोर्ट पर पकड़ा गया है। बाबा बहुत परेशान हो गए। बड़े भाई को लेकर दुबई रवाना हुए।

इन सब मुसीबतों में वह घिरी ही थी कि अमल की सगाई का कार्ड मिला। "आओगी न? तुम्हारे लिए ही कर रहा हूं आखिर।" मैसेज था या खंजर, जो उसके दिल में धंसता चला गया, लेकिन किस से शिकायत करती? उसी ने तो कहा था।

पहली बार दिल धड़का था अमल के लिए, पर आज वह भी किसी और का हो गया। लेकिन किस्मत में और भी गम लिखे थे, असली कयामत तो आना बाकी थी। दुबई में कानूनी पचड़ों में पड़कर उसके बाबा की तबीयत बहुत खराब हो गई। उसके बाबा, जो उसके सिर पर हाथ फेर कर दुआएं देते रवाना हुए थे, दुबई से उनका मुर्दा जिस्म ही वापस आया।

कई दिनों तक उसे खुद का होश ही न रहा। लेकिन किसी के जाने से जिंदगी खत्म नहीं होती, चलती रहती है। अमल के जाने पर भी और बाबा के हमेशा के लिए चले जाने पर भी। जैसे-तैसे उसने खुद को संभाला। रिजल्ट आ चुका था, उसने यूनिवर्सिटी टॉप किया था। अब वह किसी भी अच्छी फर्म में इंटर्नशिप कर सकती थी।

"कहां जा रही है?" बड़े भाई की गराजदार आवाज पर वह वहीं थम गई।

इंटर्नशिप के लिए अप्लाई किया था भाई, उसी सिलसिले में, सोच रही हूं पहले किसी सीनियर के साथ काम करके फिर अपनी प्रैक्टिस करूंगी।"

"कोई प्रैक्टिस वैक्टिस की जरूरत नहीं। हमारे घर की लड़कियां आवारागर्दी नहीं करती फिरतीं, न मर्दों के बीच जुबानदराजी, न गुंडे मवालियों के मुंह लगती हैं। क्रिमिनल, बदमाशों के बीच औरत जात का क्या काम? बाबा तो सठिया गए थे बिल्कुल।"

"नहीं, बाबा सठियाए नहीं थे। घर में एक लॉयर तो होना ही चाहिए, सारे बिजनेस और प्रॉपर्टी देखने के लिए। और वकील बस गुंडे मवालियों से डील करने के लिए ही नहीं होते हैं।"

"बस अब एक शब्द भी और कहा, तो जुबान काट कर फेंक दूंगा। हम पर वकालत मत चला। कोई जरूरत नहीं है घर से बाहर निकलने की।" अब छोटे भाई की आवाज बुलंद हो चुकी थी।

"और यह बात, वह कह रहा है, जो खुद जेल होकर आया है। क्या बात है!" निरवी के कटाक्ष पर छोटा भाई तिलमिला गया।

"चटाक चटाक..." थप्पड़ की आवाज गूंजी और अगले ही पल वह फर्श पर थी। दर्द से ज्यादा उसे हैरानी हुई थी। बाबा ने कभी ऊंची आवाज में बात नहीं की। उनके जाते ही भाइयों के तेवर ही बदल गए थे। फटे होंठ से टपकते हुए खून को साफ करने के लिए उसने पर्स में से रुमाल निकाला ही था कि भाई ने पर्स खींचकर, फोन पटक कर तोड़ दिया और उसे घसीट कर कमरे में बंद कर दिया।

गुस्से और सदमे की वजह से वह अपनी जगह पर जड़ हो गई थी। उस वक्त उसका दिमाग काम नहीं कर रहा था। उसे लगा था, कुछ देर बाद जब उसके भाइयों को अपनी गलती का एहसास होगा तो उससे माफी मांगने आएंगे, लेकिन उसे क्या पता था, यह तो बस शुरुआत है।

दरअसल उसके बाबा अपने बेटों के रंग-ढंग देखते हुए अपनी प्रॉपर्टी और बिजनेस के ज्यादातर शेयर उसके नाम कर गए थे। साथ ही उसकी सेफ्टी को देखते हुए यह शर्त भी रखी थी कि उसके भाइयों को हर महीने का खर्च और प्रॉफिट का हिस्सा उसी की मौजूदगी में, वकील और कंपनी के बोर्ड मेम्बर्स के सामने सामने दिया जाएगा। उसकी गैरमौजूदगी या मौत की हालत में सारा पैसा अलग-अलग अनाथालय और अस्पतालों में गरीबों की मदद के लिए ट्रांसफर हो जाएगा।

"अब हम क्या करें? न इस से प्रॉपर्टी के पेपर पर साइन करवा सकते हैं, न इसको मार सकते हैं। मेरा बस चलता तो इसकी जान ले लेता और सारी प्रॉपर्टी अपने नाम कर लेता लेकिन इसके मरने से तो हमें एक फूटी कौड़ी भी नहीं मिलेगी, यह महल हाथ से जाएगा और बिजनेस भी तभी तक हमारे पास है, जब तक यह जिंदा है। ऊपर से यह खुद वकील है, लॉ की जानकार है, इसे आसानी से बेवकूफ भी नहीं बनाया जा सकता।" छोटा गुस्से में आगबबूला हो रहा था।

"पैसा हो, सेटिंग हो, पॉवर हो तो सब कुछ किया जा सकता है। फिलहाल तो हमें इसे कैद करके रखना होगा और इससे छुटकारे का कोई रास्ता सोचना होगा।" बड़े ने ठंडे दिमाग से सोचते हुए कहा।

"भाई, आप लोग यह सब क्यों कर रहे हैं? आप लोगों को जो चाहिए, आप ले लीजिए, मैं सबकुछ आपको देकर यहां से बहुत दूर चली जाऊंगी। कभी आपको अपनी शक्ल भी नहीं दिखाऊंगी, न ही कोई क्लेम करूंगी, आपको जिस कागज पर साइन करवाना है, करवा लीजिए लेकिन प्लीज यह सब मत कीजिए।" वह रो रही थी, विनती कर रही थी, लेकिन उसके भाइयों पर कोई असर नहीं हुआ।


गांव से बहुत दूर वीराने में एक अंडरग्राउंड सेटअप था। ऊपर से देखने पर आम जंगली बंजर इलाका मालूम होता था, लेकिन जमीन के नीचे सारे अवैध कामों का बेस बना हुआ था नकली शराब, ड्रग्स, किडनैप करके लाए गए बच्चे और लड़कियां, क्या नहीं था वहां। वहीं एक छोटी सी कोठरी में उसे डाल दिया गया था। बोर्ड मेम्बर्स और वकीलों को डरा धमकाकर और पैसों से मुंह बंद करके अपने फेवर में कर लिया गया था। महीने के आखिर में वे आकर डॉक्यूमेंट पर साइन करवा कर ले जाते थे।

उधर पूरे दो साल भर बाद अमल अपनी शादी का कार्ड देने आया था, यह काम वह खुद अपने हाथों से करना चाहता था। उसे अब भी हल्की सी उम्मीद थी कि शायद निरवी का मन बदल जाए। उसकी बहुत अच्छे से मेहमाननवाजी करके भाइयों ने उसे बता दिया था कि निरवी शादी करके अपने हसबैंड के साथ फ्रैंकफर्ट शिफ्ट हो गई है। उसने अपना फोन नंबर बदल लिया है और किसी को भी देने से मना किया है, खासकर अपनी यूनिवर्सिटी के किसी लड़के को।

"इतनी जल्दी शादी और अपने दोस्तों को बताया भी नहीं, ऐसा कैसे? मेरी तो सगाई को दो साल हुए, शादी अब कर रहा हूं।" होठों पर मुस्कुराहट लाते हुए अमल ने पूछा, जबकि उसे गहरा सदमा लगा था।

अब तो वह मां बनने वाली है। यह देखो," निरवी के साथ एक भूरे बालों वाले गोरे गुलाबी हैंडसम लड़के की तस्वीर थी। अमल को शॉक लगा, फिर भी उसने दिल को तसल्ली दी कि क्या हुआ, जो उसने पुराने सब नाते खत्म कर दिए। उसे भी तकलीफ होती, मुझे भी। उसके बाद अमल ने दोबारा उसके घर क्या, उसके शहर का भी रुख नहीं किया था।

धीरे-धीरे वह सब कुछ भूलने लगी थी। दिन रात बस शून्य में ताकती रहती थी। जो खाना उसके सामने फेक जाते थे, कई बार तो वह भी ऐसे ही रखा रह जाता था। कब सोना, कब जागना, कब खाना, कब पीना, वह सबका होश भूलने लगी थी। उसे लगता था मौत अब करीब है। एक दिन उसने आंखें मूंदी तो फिर नहीं खोलीं।

तभी अचानक चारों तरफ शोर शराबा और अफरा-तफरी फैल गई। फ्लैश लाइट में रेस्क्यू टीम ने देखा कि हड्डियों के ढांचे सा कुछ फर्श पर पड़ा है। "नब्ज चल रही है। यह जिंदा है।" उसे स्ट्रेचर पर डालकर बाहर लाया गया।

कई दिन बाद जब उसे होश आया, उसने देखा कि अमल का हाथ उसके कमजोर हाथ में था। एक पल को तो उसे लगा कि शायद वह मर चुकी है और स्वर्ग में अपने प्यार के साथ है पर दूसरे ही पल उसे अपने से जुड़ी मशीनें और ड्रिप नजर आईं।


"मैं जिंदा हूं। मैं बिल्कुल जिंदा हूं।" सवाल पहले आश्चर्य, फिर ख़ुशी भरे जवाब में बदल गया। वह सुइयां और लीड अलग खींचकर अमल के गले लग गई।

आई एम सॉरी निरवी, आई एम सो सो सॉरी। मैं तुम्हारा गुनहगार हूं। मेरी वजह से तुम्हें सात साल वह नरक भोगना पड़ा।"

"सात साल..?" वह बड़बड़ाई।

"हां, अमल की आंखों से आंसुओं की बरसात जारी थी।

निरवी तो अपने हिस्से का पहले ही रो चुकी थी। उसके आंसू भी सूख चुके थे। सिर्फ सात साल में वह अपनी उम्र से पंद्रह साल बड़ी लगने लगी थी। बालों में सफेदी, हाथ पैरों में झुर्रियां, गड्ढे में धंसी आंखें और गाल। कोई उसे देखकर यह कह नहीं सकता था यही कॉलेज की सबसे खूबसूरत लड़कियों में से एक थी। जिसे अभी भी खुद से ज्यादा अमल की फिक्र थी।

"तुम कैसे हो? फैमिली कैसी है? तुम्हारी बीवी और बच्चे?

"मैं तो अपनी शादी का कार्ड देने आया था, पर ओवरस्मार्ट बनते हुए तुम्हारे भाई ने तुम्हारी तस्वीर मुझे दिखाई, और यही चाल उनको भारी पड़ गई। फोटो तुम्हारे घर के किसी गोदभराई फंक्शन का था, जिसमें तुमने प्रेग्नेंट लेडी के गेटअप में डांस किया था और जिसकी फोटो और वीडियो तुमने मुझे दिखा रखी थी। उसी को एडिट करके साथ में एक लड़के को खड़ा कर दिया गया था। साथ ही तुमने कहा था कि तुम्हारे बाबा तुम्हारी शादी खानदान के बाहर कहीं नहीं करेंगे और तुम्हारे खानदान से कोई भी जर्मनी में नहीं रहता था। अगर बाद में भी शिफ्ट हुआ होता तो चेहरा मोहरा और फीचर्स यूरोपियन कैसे हो सकते थे।

वहीं से मेरा माथा ठनका। मैंने अपनी शादी कैंसिल की, पूरे फ्रैंकफर्ट में अपने सोर्स लगाए, खुद भी तुम्हें वहां जाकर ढूंढा। तुम्हारा कोई सुराग नहीं था। इतना तो तय था कि तुम इंडिया छोड़कर कहीं नहीं गई हो, लेकिन तुम्हारे भाइयों की एप्रोच इतनी तगड़ी थी और उन्होंने सब कुछ इतने अच्छे से कवर कर रखा था कि तुम्हारी कोई जानकारी मिल ही नहीं रही थी। उनके इस सिस्टम में घुसपैठ करके उनकी सारे काले धंधों की जानकारी निकालने, सबूत इकट्ठा करने और उन्हें कानून के शिकंजे में फंसाने मैं मुझे पांच लंबे साल लग गए।

अगर मुझे जरा भी अंदाजा होता कि तुम्हें इस तरह जानवरों की तरह रखा गया है तो मैं कानून को परे रखकर इन दोनों को उठवा लेता और इनकी वह हालत करता कि खुद ही अपनी मौत मांगते। क्या तुम मुझे माफ कर पाओगी तुम्हारी जिंदगी के उन सात सालों के लिए, दो साल मेरी बेखबरी और पांच साल यह देर?"

"ऐसा मत बोलो अमल प्लीज। मैं तुम्हारी जिम्मेदारी नहीं थी, फिर भी तुमने कोई कसर नहीं छोड़ी मुझे ढूंढने में। मुझे तो मेरे सगे रिश्तों ने ही बरबाद किया। बहुत दौलत के साथ बहुत साजिशें भी विरासत में मिलती हैं। यह तुम्हारा प्यार ही था जिसकी वजह से आज मैं जिंदा हूं और अब खुश भी।"


उसने आंखें मूंदकर श्रद्धा से अपने प्रेम के आगे दोनों हाथ जोड़ दिए और अमल ने प्यार से उसका माथा चूम लिया।


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