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प्यार के लिए कुछ भी

 प्यार के लिए कुछ भी:


बीवी से झूठ बोलकर राजन सीमा से छिपकर मिलता रहा, जब सच उजागर हुआ तो तीन जिंदगियां बिखर गईं



एंबुलेंस तेज रफ्तार से हॉस्पिटल की ओर दौड़ रही थी। मुंह पर लगे ऑक्सीजन मास्क के बावजूद स्वाति की उखड़ी सांसें सामान्य नहीं हो पा रही थीं। उसकी बड़ी-बड़ी आंखें बहुत कुछ कहने को बेताब थीं, लेकिन होंठ चिपक से गये थे।

हैरान-परेशान बैठा राजन सोच रहा था, ‘ये क्या हो गया, कैसे हो गया..?’ अनहोनी की आशंका से उसका दिल जोर से धड़क रहा था। स्वाति की उखड़ती सांसों ने राजन के पूरे अस्तित्व को झकझोर कर रख दिया। उसे खो देने का भय राजन के चेहरे पर साफ दिखाई दे रहा था।

दस साल हो गए स्वाति और राजन की शादी को। दोनों के बीच बेइंतहा प्यार था।




 लोग दोनों का सफल वैवाहिक जीवन की मिसाल देते नहीं थकते थे।


स्वाति बहुत हंसमुख थी, दिन भर हंसते मुस्कुराते अपनी सारी जिम्मेदारियों को पूरा करती। राजन की वक्त बेवक्त की गुहार पर दौड़ी चली जाती। बड़ा लाड़ आता उसे अपने पतिदेव पर। कभी तौलिया भूल जाता, तो कभी मुंह पर साबुन लगा कर शावर न ढूंढ पाने की शिकायत करता। कभी कमीज का बटन खुद ही ढीला करके फिर पहने ही पहने टंकवाता। स्वाति के लिए उसकी सुबह राजन से थी, शाम राजन से थी। उसकी जिंदगी राजन से शुरू होकर राजन पर ही खत्म हो जाती थी।

जब सब कुछ सहज ही उपलब्ध हो तो वो बेमोल हो जाती है। कुछ लोग कभी तृप्त नहीं होते। राजन भी उन्हीं लोगों में से था। गुजरते वक्त के साथ स्वाति का इजहार, मनुहार और भावनाओं को उजागर करना उसे छिछोरापन लगने लगा।

पढ़ाई पूरी करते ही उसे स्वाति के साथ शादी के बंधन में बांध दिया गया, तो पढ़ाई लिखाई, गेम्स में टॉप पर रहने वाला राजन एक अदद ‘हसबैंड’ बन कर रह गया। ऑफिस के काम और टीवी, चैटिंग से कब तक मन बहलाता। धीरे धीरे उसका मन घर में कम दोस्तों की मंडली में ज्यादा रमने लगा।

उनके आजाद खयाल, मॉडर्न लाइफस्टाइल,गर्लफ्रेंड के साथ बिताए रंगीन पलों के किस्से उसे एक अबूझ मोहक परिवेश में ले गए। उसे अपना और स्वाति का प्यार मैकेनिकल लगने लगा। जहां भी वो दो यंग कपल्स को देखता तो एक अबूझ सी कसक उठती। उसके अंदर का शोर सारे बंधन तोड़ उन्मुक्त जीवन को प्रेरित करने लगता।


जहां स्वाति के मन में बेपनाह प्यार उफनता, वहीं अब राजन का अतृप्त मन, उसकी फ्लर्टिंग करने की चाहत जहर बन कर बाहर आने को आतुर रहती।

इसी दौरान उसकी मुलाकात फुल ऑफ एटीट्यूड, स्मार्ट, खूबसूरत, नाज-नख़रों से भरी हुई सीमा से हुई। ऑफिस में उसका नया नया ट्रांसफर हुआ था। राजन उसका गाइड बन उसके इर्द-गिर्द फिरता रहता।


घर में आया के रूप में स्वाति थी जो उसकी दीवानी थी और बाहर ऐसी काया थी जिसका वो दीवाना था।

सुबह-सुबह ही वो शुरू हो जाता, “ऑफिस में कांफ्रेंस है मेरे कपड़े निकाल देना, और हां, प्लीज मेरा जूता भी पॉलिश कर देना। डार्लिंग मेरे गॉगल्स निकाल देना..”

अगले ही पल ऑर्डर बजाता, “बहुत देर हो गयी है, जल्दी करो... नाश्ता टेबल पर रख देना… और हां, टिफिन मत देना, आज ऑफिस में ही लंच है।” इन सबके बीच वो प्लीज, डीयर और डार्लिंग की गुगली देना भी न भूलता। स्वाति भाव विभोर होकर उसकी हर डिमांड पूरी करती जाती।

धीरे-धीरे राजन और सीमा का प्यार परवान चढ़ने लगा। सीमा बेहद शौकीन और फैशन परस्त थी। बस कमाना और खर्च करना। मौका मिलते ही दोनों शॉपिंग या कभी मॉल निकल जाते।




राजन की बुझी-बुझी मनोदशा अब चिंता का विषय बनने लगी थी। स्वाति कभी पूछती, तो राजन, “ऑफिस में ज्यादा काम है” या “प्रोजेक्ट की डेडलाइन है” का बहाना बना कर टाल जाता।

स्वाति की तो एक ही तमन्ना थी कि राजन खुश रहे। उसने न कभी राजन से कोई फरमाइश की थी, न ही कभी कोई जिद उसके इसी व्यवहार ने राजन को लापरवाह बना दिया था।

आईसीयू में स्वाति की हालात में कोई सुधार नहीं हो रहा था। जिंदगी के दरवाजे पर मौत की दस्तक देखकर राजन की घबराहट बढ़ती जा रही थी। दोनों बच्चों को सीने से लगाये वो कांच से लगातार उसे देखे जा रहा था।


मन कर रहा था चीख चीख कर कहे,“स्वाति उठो, मैं तुम्हारे बिना नहीं रह सकता।”

दृश्य पर दृश्य वो बातें उसके जेहन में घूमने लगीं थीं। जब जब उसने स्वाति की भावनाओं को ठेस पहुंचाई थी।

उसकी आत्मा उसे कचोट रही थी, “यह तुम्हारी ही करनी का फल है। तुम स्वाति को छोड़ना चाहते थे। देखो, अब वो खुद तुम्हें छोड़ कर जा रही है।”

“ नहीं...” वो चीख पड़ा।

तभी सीमा का फोन आ गया,“जानू... कहां हो तुम?”

“सिटी हॉस्पिटल में।”

“क्यों, क्या हुआ?”

“स्वाति को हार्ट अटैक आया है।”

“ये स्वाति कौन है?”

“मेरी पत्नी, उसकी हालत गंभीर है!”

“राजन, तुम शादीशुदा हो?”

“हां, और मेरे दो बच्चे भी हैं।”

सीमा गुस्से में पैर पटकती हॉस्पिटल पहुंची। राजन को बहुत खरी-खोटी सुनाना चाहती थी, लेकिन राजन की लाल सूजी आंखें, बिखरे बाल, शर्ट के बेतरतीबी से लगे बटन… देख कर उसने चुप रहना ही मुनासिब समझा।

“मैं स्वाति के बिना नहीं जी पाऊँगा।” राजन दहाड़ें मार कर रो रहा था।

सीमा फटी फटी आंखों से राजन को देख रही थी। दिन में कई बार ‘आई लव यू’ की गुहार लगाने वाला राजन असली था या ये राजन असली है, जो उसके सामने खड़ा है!

उसने राजन की हिम्मत बढ़ायी, “डोंट वरी राजन, सब ठीक हो जाएगा।”

“अगर स्वाति को कुछ हो गया तो…” राजन का अविश्वास उसकी आंखों में तैर आया।

“मैं हूं न राजन। तुम मुझ से शादी करना चाहते थे न। देखो, भगवान ने भी हमारी सुन ली।”

राजन ने तड़ाक से एक थप्पड़ सीमा के गाल पर जड़ दिया। गाल पकड़ कर सीमा तिलमिला उठी, “तुमने मुझे मारा!”

“हां, तुम्हारी हिम्मत कैसे हुई ऐसा कहने की? मैं मूर्ख था, मेरे लिए जिंदगी मजा-मस्ती का दूसरा नाम था, इसीलिए तुम से प्यार कर बैठा।

एक ही रात में राजन के बदलाव को देखकर सीमा हैरान थी।

मैंने स्वाति को खुद तुम्हारे बारे में बताया था। सब कुछ जान कर उसका चेहरा सफेद पड़ गया। ऐसा लग रहा था जैसे किसी ने उसके शरीर से जान ही निकाल ली हो।

उसने मुझ से कहा, “राजन मैं तुमसे बहुत प्यार करती हूं। तुम्हारी खुशी के लिए एक जन्म तो क्या सैकड़ों जीवन कुर्बान कर सकती हूं। तुम वो ही करो जिसमे तुम्हें खुशी मिलती है। लेकिन एक सवाल जरूर पूछूँगी तुम से, ये सब कब से चल रहा है?”

“दो साल से...”

“दो साल से तुम मुझ से झूठ बोलते आ रहे थे?”

“सीमा की खूबसूरती, उसके नखरे, उसकी अदाएं ऐसी ही हैं कि मैं उसकी तरफ चुपचाप खिंचता चला गया।”

मैं बेशर्मों की तरह बोलता चला गया, वो नजरें झुकाए सुनती रही।


फिर बोली, “राजन, एक बात याद रखना। हमारी आवारा इच्छाएं उन्मादित लहरों की तरह होती हैं और लहरों पर घर नहीं बनाए जा सकते, घर बनता है समतल धरातल पर।”

“स्वाति के एक-एक शब्द ने मुझे अंदर तक कुरेद कर रख दिया। एक बार, सिर्फ एक बार ईश्वर मेरी प्रार्थना सुन लें और मेरी स्वाति को स्वस्थ कर दे। उस से अपने गुनाह की माफी मांग कर मैं प्रायश्चित करना चाहता हूं।”

सीमा सोच रही थी, समझ भी रही थी कि, “सीमा लांघती हमारी इच्छाएं, हमारी चाहतें, हमारी लापरवाहियां, हमारा उन्माद सागर की उन लहरों की तरह है जो जब भी किनारे से टकराती हैं, तो जमीन का बहुत बड़ा हिस्सा काट कर ले जाती हैं। काश, ये बात राजन ने समझी होती तो तीन जिंदगियां बिखरने से बच गयी होतीं।








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