(1) तारापुर विद्रोह:-
तारापुर का विद्रोह सन् 1842 - 1854 के मध्य हुआ था, इस समय यहां पर भूपालदेव का शसन था।
भुपाल देव का सौतेला भाई दलगंजन सिंह के नेतृत्व में यह विद्रोह किया गया था।
जब जगबंधु को दीवान बनाया गया था,तब जगबंधु आदिवासियों के ऊपर बहुत शोषण करता था और दिए जाने वाले कर को भी बढ़ा दिया गया था।
इन सब के विरोध में आदिवासी लोगों ने विद्रोह करना आरंभ कर दिया, इस विद्रोह का परिणाम यह हुआ कि अंग्रेज अधिकारी विलियम्स ने आदिवासियों के मांगों को स्वीकार किया,और जगबंधु को भी दीवान के पद से हटा दिया गया।
( 2) मेरिया विद्रोह:-
मेरिया का विद्रोह सन 1842-1863 के मध्य हुआ था, इस समय भुपालदेव शासन कर रहे थे।
जब अंग्रेजों और मराठों को पता चला कि आदवासियो के द्वारा नरबली प्रथा चलया जा रहा हैं तब अंग्रेज इनका विरोध करने लगें।
तब आदिवासी हिड़म माझी के नेतृत्व में मेरिया विद्रोह करने लगें अपने संस्कृति तथा सभ्यता को बचाने के लिए किया गया ये विद्रोह मेरीया विद्रोह कहलाता हैं।
इस विद्रोह का दमन करने के लिए अंग्रेजो ने दंतेश्वरी माता के मंदिर में सेना तैनात कर दिया और दीवान वामनराव के सुझाव पर रायपुर के तहसीलदार शेर खां को नरबली पर नियंत्रण के लिए नियुक्त किया गया था।




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