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 छत्तीसगढ़ का इतिहास

  लिंगागिरी विद्रोह (1856-1857):-

             इसे बस्तर का महामुक्ति संग्राम कहते हैं।

          जब लिंगागीरी विद्रोह हुआ तब भूपालदेव शासक थे, सन 1856- 1857 के मध्य यह विद्रोह हुआ था।
                                          इस विद्रोह का नेतृत्व धुर्वा राव माड़िया के द्वारा किया गया था, आदिवासियों के ऊपर जब शोषणकारी नीति चलाई जा रही थी, तब आदिवासी अपने स्वतंत्रता के लिए यह विद्रोह कर रहे थे।
                                            परिणाम यह निकला कि 5 मार्च 1856 को धुर्वा राव को फांसी की सजा दे दिया गया।

 इस प्रकारधुर्वा राव छत्तीसगढ़ के दुसरे शहिद हुवे।



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