यह विद्रोह आदिवासियों के द्वारा नांगुल दोरला (फोतकेल के जमींदार) और भोपाल पटनम के जमींदार राम भोई और भेजी के जमींदार जुग्गा राम के साथ मिलकर किया था।
जब अंग्रजो द्वारा साल वृक्ष को काटकर ठेकेदारों को बेचा जाता था, तो इसके विरोध में यह विद्रोह किया गया था, साल वृक्ष को बचाने के लिए।
इनका नारा था"एक साल वृक्ष के पीछे एक सर"
इसका परिणाम यह हुआ कि कैप्टन ग्लासफर्ड( सिरोचा डिप्टी कलेक्टर) द्वारा हार स्वीकार किया गया तथा आदिवासियों को सफलता मिली, साल वृक्ष की कटाई बंद कर दिया गया।
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