भूमकाल विद्रोह (1910)
✓ नारा:-
बस्तर आदिवासियों का हैं।
भूमकाल का अर्थ भूमि का हिलना होता है
✓शासक:
जब भूमकाल विद्रोह हुआ था, तब रुद्रप्रताप देव यहां के शासक थे।
✓नेतृत्वकर्ता :
गुण्डाधुर (नेतनार नामक गांव का नेता हुआ करता था ये राजवंश का था)।
जब अंग्रेज लाल कालेंद्र सिंह और राजमाता सुवर्ण कुंवर देवी की उपेक्षा करते थे उन पर अत्याचार करते थे तो आदिवासियो के द्वारा यह विद्रोह किया गया इस विद्रोह के लिए राजमाता सुवर्ण कुंवर देवी और लाल कालेंद् सिंह ने आदिवासियो को प्रेरित किया।
बस्तर में जो दीवान था वह भी राजवंश का नही था और बहुत आत्याचारी था उसको हटाने के लिए भी विद्रोह किया गया था। जो दीवान था बैजनाथ पंडा वह बस अंग्रेजो के लिए काम करता था।
और अंग्रेजो के द्वारा आदिवासियो के दैनिक जीवन के कामों पे भी पाबंदी लगा दीया गया था जैसे
* घरेलू मंदिरा पर पाबंदी।
* कर वृद्धि के विरोध में
* अंग्रेजो के नया शिक्षा नीति
*बेगारी प्रथा का विरोध
* बस्तर के बाहरी प्रवेश पर विरोध पे
* पुलिस का आदिवासियो पर अत्याचार का
*ईसाई मिस्नरियो द्बारा धर्म के प्रचार के खिलाफ आदि के लिए विद्रोह किया गया।
इस समय विभिन्न घटना भी हुआ:
• 1फरवरी1910 को पुसपाल बाजार को और करंजी बाजार को लुटा गया।
• 4फरवरी1910 को कुकानार बाजार में एक व्यापारी को मार दीया गया।
• 29मार्च को विद्रोह का अंत हो गया।
इस विद्रोह का प्रतीक
लाल मिर्च, मिट्टी के ढेले, धनुष बाण, भाले, आम की टहनियां।
विद्रोह के दमनकर्ता:
पॉलिटिकल एजेंट T ब्रेट, सुप्रीम कमांडर गेयर थे




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