#छत्तीसगढ़ का आदिवासी विद्रोह
(1) हल्बा विद्रोह:-
छत्तीसगढ़ में हल्बा विद्रोह सन 1774-1777 के मध्य हुआ था, बस्तर के डोंगर क्षेत्र में।
शासक और नेतृत्व कर्ता:-
अजमेंर सिंह डोंगर वाले क्षेत्र का राजा था, वह वही पे शासन करता था, लेकिन उसके सौतेले भाई दरिया देव जब उस पे अंग्रेजो , मराठों, तथा जैपुर (उड़ीसा) वालो के साथ मिलकर आक्रमण करते है तो वहां के आदिवासी क्रोध में आकर विद्रोह कर देते हैं।
इस विद्रोह में जितने भी हल्बा आदिवासी विद्रोह करते रहते हैं सबको मार दिया जाता है, केवल एक व्यक्ति बचता है।
ये विश्व का सबसे बड़ा नरसंहार माना जाता हैं।
(2) परलकोट विद्रोह:-
सन 1825 ईस्वी में, बस्तर के परल कोट नामक स्थान में हुआ था।
शासक और नेतृत्व कर्ता:-
इस समय शासक महिपालदेव थे, ये विद्रोह गेंद सिंह नामक परल कोट के जमींदार के द्वारा किया गया था।
जब मराठों तथा अंग्रेजो द्वारा आदिवासियों के रहन सहन में हस्तक्षेप होने लगा और कर को भी बढ़ा दिया गया, शोषण बहुत ज्यादा बढ़ गया तब आदिवासियों ने अपने संस्कृति तथा स्वतंत्रता के लिए यह विद्रोह किया।
आदिवासी विद्रोहियों के द्वारा धावड़ा वृक्ष के टहनी से एक दूसरे को संकेत दिया जाता था।
इस विद्रोह का परिणाम यह निकला कि छत्तीसगढ़ के अधीक्षक एगन्यू कैप्टन पेव ने इसका दमन कर दिया और 20जनवरी 1825 को गेंद सिंह को फांसी दे दिया गया।
इस प्रकार गेंद सिंह छत्तीसगढ़ (बस्तर) के प्रथम शहिद थे।




1 टिप्पणियाँ
Nice thank you
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