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नफ़रत भरी प्यार

  नफ़रत से भरे प्यार की दिलचस्प कहानी, जिनता उतरेंगे उतना डूबेंगे

इश्क से नफरत हो गई:माही की प्रेम कहानी देखकर देविका को उससे जलन होने लगी, अब उसे अपनी जिंदगी में ऐसा प्यार चाहिए

देविका आज जल्दी ही तैयार होकर कॉलेज के लिए निकल पड़ी थी। आज का दिन उसके लिए बहुत खास था। आज उसका केमिस्ट्री विभाग के अध्य्क्ष के रुप में पहला दिन था। बरसों से इसी कॉलेज में प्राध्यापिका के रूप में काम कर रही थी। उसे खुशी थी कि कॉलेज संचालन ने उसके योगदान को सराहा और उसे पद्दोनति दी। विभाग अध्यक्ष को एक सहायक भी दिया गया था।

देविका कॉलेज में इस नई पारी को शुरू करने के लिए बहुत उत्साहित थी। हो भी क्यों न? जीवन के न जाने कितने अमूल्य वर्ष उसने इस कॉलेज को दिए थे। जबसे बेटे आयुष का इंजीनियरिंग के बाद लंदन में जॉब लगा था वो बिल्कुल अकेली हो गई थी। अनिल को तो उनके ऑफिस और मीटिंग्स से फुर्सत ही न थी। देविका के लिए उनके पास वक्त ही कहां था। मायूस होकर उसने भी अपना पूरा वक्त कॉलेज और स्टूडेंट्स के भविष्य को समर्पित कर दिया था। जब उसे कॉलेज प्रबंधन से प्रमोशन का प्रस्ताव आया तो उसने तुरंत उसे स्वीकार कर लिया।


देविका अपने ऑफिस रूम में पहुंच कर नए काम में मशरूफ हो चुकी थी। उसे अपने सहायक से मिलने की भी उत्सुकता थी। थोड़ी देर में दरवाजे पर दस्तक हुई। सामने कोई 23-24 साल की युवती हाथ में नियुक्ति पत्र लिए खड़ी थी।

देविका ने उसे ध्यान से देखा, जींस और कुर्ता पहने, करीने से कटे बाल और हल्के मेकअप में वो युवती आकर्षक लग रही थी।

"मेरा नाम माही है।" युवती ने अपना नियुक्ति पत्र सौंपते हुए परिचय दिया।

सारी औपचारिकताएं पूरी करके माही ने काम शुरू कर दिया। देविका कनखियों से माही की तरफ देख रही थी। माही थोड़ी-थोड़ी देर में अपना फोन देखती और मुस्कुराते हुए कभी मैसेज करती तो कभी हौले-हौले किसी से बात करती।

"आज कल के युवा सिर्फ फोन पर ही लगे रहते हैं। काम की कोई चिंता नहीं है इन्हें।" सोचते हुए देविका अपने काम में लग गई।

दोपहर लंच ब्रेक में देविका अपने रूम में ही खाना खा रही थी। "क्या मैं आपके साथ यहीं लंच कर सकती हूं?" माही ने पूछा।

"हां-हां, क्यों नहीं।" देविका ने सामने कुर्सी की तरफ बैठने का इशारा किया। दोनों बाते करते हुए खाना खाने लगे। माही उत्सुकता से देविका से उसके अनुभवों के बारे में पूछ रही थी। वो ये जानकर थोड़ी हैरान थी कि देविका को इसी कॉलेज में 20 वर्ष हो गए।


माही ने बताया कि उसने तो पिछले साल ही अपनी कॉलेज की पढ़ाई पूरी की है और एक प्राइवेट कॉलेज में कुछ महीने काम करने के बाद ये उसकी दूसरी नौकरी है। इस दौरान भी थोड़ी-थोड़ी देर में माही का फोन बज रहा था और वो कॉल काटती जा रही थी।

"फोन उठा लो। शायद किसी को कुछ जरूरी काम हो," देविका ने बार-बार बजती फोन की घंटी से परेशान होकर कहा।

"नहीं, कुछ जरूरी नहीं है। मेरा बॉयफ्रेंड साहिल बार-बार कॉल कर रहा है। बहुत प्यार करता है मुझसे। आज मेरा पहला दिन है नए काम का इसीलिए फोन करके जानना चाहता है कि मेरा दिन कैसा जा रहा है," माही इठलाते हुए बोली।

देविका सोच में पड़ गई कि आज उसका भी तो पहला दिन है इस नए रोल में, लेकिन अनिल ने सुबह से फोन तो क्या एक शब्द बात भी नहीं की। किसी ने सही कहा है कि वक्त के साथ प्यार का रंग हल्का हो जाता है। देविका को माही से जलन सी होने लगी।

देखते ही देखते पहला दिन पूरा हो चला था। देविका ने घर जाने के लिए अपना बैग उठाया। माही भी अपना पर्स उठा कर तैयार थी।

"तुम्हारा घर क्या पास ही है?" देविका ने माही से पुछा।

"नहीं! श्याम कॉलोनी में रहती हूं जो थोड़ी दूर है यहां से। साहिल मुझे घर तक छोड़ देगा।" माही का जवाब सुनकर देविका बाहर चल पड़ी।

कॉलेज के गेट से देविका की कार बाहर निकल रही थी। देविका ने देखा, माही एक सुंदर युवक की बाइक के पीछे बैठ कर जा रही है और दोनों हंसते हुए बात कर रहे है। देविका की कार ट्रैफिक में फंसी हुई थी जबकि साहिल की बाइक कारों के बीच में से सड़क को चीरती हुई आगे बढ़ गई और नजरों से ओझल हो गई।

देविका सोचने लगी, जब उसकी नई-नई शादी हुई थी तब अनिल के पास भी एक मोटरसाइकिल थी। न जाने कितने साल दोनों उसी पर घूमे हैं। आयुष को भी कैसे अनिल आगे बिठा लिया करते थे। कितने सुहावने दिन थे वो उसके जीवन के। वक्त के साथ साथ अनिल और वो दोनों ही काम और घर की जिम्मेदारियों के बोझ तले दबते चले गए।

मोटरसाइकिल की जगह अब कार आ गई है घर में। पर अब साथ में कार में घूमने का वक्त ही नहीं मिलता। अनिल को ऑफिस के काम से कई बार दूसरे शहर दौरे पर जाना पड़ता था। देविका ने भी अपने आप को पहले आयुष की पढ़ाई और करियर, बाद में अपने कॉलेज के काम में रमा लिया। यूं तो सब ठीक ही चल रहा था, पर कभी-कभी उसका मन करता कि अनिल थोड़ा तो उससे प्यार और अपनापन जताएं।

देविका को माही किसी दिन अपने फिल्म देखने के प्लान के बारे में बताती तो कभी बताती कि कैसे वो और साहिल साथ में वीकेंड मनाने पास के रिसोर्ट गए थे। फिल्में देखने का तो उसे भी शौक था, पर अनिल कभी साथ चलने को राजी न होते। देविका अनमने मन से माही की बातें सुनकर खुद को काम में बिजी करने की कोशिश करती।

अभी कुछ दिन पहले ही माही ने उसे अपने फोन पर दिखाया कि कैसे फेसबुक पर साहिल ने उसके लिए एक रोमांटिक वीडियो बनाकर डाला है और वो इसका जवाब इंस्टाग्राम पर वीडियो बनाकर देगी। देविका को ये सब बातें पहले तो बचकानी लगती थीं, पर अब उसको लगने लगा था कि ये सब प्यार के प्रदर्शन का एक तरीका ही तो है तो इसमें बुराई कैसी?

कुछ ही दिनों में कॉलेज में साइंस मेले का आयोजन होने वाला था और सभी विभाग उसके लिए पूरी लगन से तैयारी कर रहे थे। देविका ने भी केमिस्ट्री विभाग की ओर से प्रयोगशाला और कार्यशाला तैयार की थी और माही इस काम में उसकी मदद कर रही थी।


देवका मैडम! आप जानती हैं, जिस दिन साइंस मेला है उस दिन मौसम विभाग ने बारिश और तूफान की चेतावनी दी है? साहिल तो उस दिन कॉलेज जाने से ही मना कर रहा है।" माही दीवार पर बैनर लगाते हुए बोली।

"कॉलेज के लिए ये दिन काफी महत्वपूर्ण है और मैं उम्मीद करती हूं कि तुम इस आयोजन को सफल बनाने में मेरी मदद करने जरूर आओगी। वैसे भी जरूरी नहीं कि उस दिन मौसम खराब हो !" देविका ने उखड़े स्वर में कहा। वो चाहती थी कि उसका विभाग साइंस मेले में सबसे अच्छा दिखे और वो तैयारी में कोई चूक नहीं होने देना चाहती थी।

आखिरकार सारी तैयारी पूरी हो चुकी थी और वो दिन भी आ गया जिसकी उसको प्रतीक्षा थी। स्टूडेंट्स और अन्य लोगों ने बढ़ चढ़ कर साइंस मेले में भाग लिया। उसके विभाग की तैयारी और साज सज्जा देख कर सभी उसकी प्रशंसा कर रहे थे। केमिस्ट्री विभाग को बेस्ट डिपार्टमेंट का अवॉर्ड दिया गया। देविका का चेहरा गर्व से चमक रहा था। उसकी दिन-रात की मेहनत रंग जो लायी थी।

समारोह लगभग खत्म होने वाला था और सभी विभाग अपनी प्रदर्शनी और दूसरे सामान समेट रहे थे। बाहर जोरों से बारिश शुरू हो गयी थी। कड़कती हुई बिजली की आवाज और रोशनी ने देविका का ध्यान खिड़की की तरफ खींचा। खिड़की के पास खड़ी माही प्रयोग के सारे उपकरण बक्सों में रख रही थी। माही का चेहरा एकदम बुझा सा लग रहा था।

"क्या हुआ माही? क्या तुम हमारे विभाग को मिले पुरुस्कार से खुश नहीं हो?"

"ऐसी बात नहीं है! मैं तो ठीक ही हूं।" माही ने अपने आंसू छिपाते हुए कहा।

देविका माही के पास गई तो वह खुद को रोक न सकी। रोते हुए उसने बताया कि साहिल को उसने किसी दूसरी लड़की के साथ कई बार देखा है और आज कल वो उससे बात भी नहीं कर रहा है। आज भी उसने कई बार साहिल को फोन करने की कोशिश की, पर उसने उसका फोन नहीं उठाया। देविका स्तब्ध थी कि उससे क्या कहे।

काम खत्म करके दोनों बाहर जाने के लिए निकलीं। बाहर बारिश अब बहुत तेज हो चली थी और शहर के कई निचले हिस्सों में पानी भर गया था। यातायात एक दम ठप्प जान पड़ता था। देविका और माही दोनों साथ में कॉलेज के गलियारे में खड़ी तेज होती बारिश को देख रही थी। दोनों सोच रही थीं कि अब घर कैसे जायेंगे। देविका के ड्राइवर ने फोन कर दिया था कि इलाके में पानी भरने की वजह से वो कॉलेज आने में असमर्थ है।

देविका और माही दोनों के चेहरे पर चिंता के बादल थे, क्योंकि रात होने वाली थी और बारिश के थमने का कोई आसार नजर नहीं आ रहा था। ऐसे मौसम में कोई ऑटो या टैक्सी वाला भी दिख नहीं रहा था।

देविका इधर-उधर देख ही रही थी कि एक कार उसके सामने आकर रुकी। कार का शीशा जैसे ही नीचे हुआ तो देखा उसके अंदर ड्राइवर के साथ अनिल बैठे हुए थे।

"जल्दी से अंदर बैठ जाओ" अनिल ने आवाज लगाई। देविका, माही को साथ लेकर कार के अंदर बैठ गयी। "आप यहां कैसे आ गए?" अनिल को देखकर वो हैरान थी।

"मैंने टीवी पर देखा कि तुम्हारे कॉलेज के आसपास पानी भर गया है और कोई यातायात की सुविधा नहीं है। मुझे आज दौरे पर जाना था, पर वो कैंसिल करके तुमको यहां लेने आ गया। बारिश तो आज पूरी रात रुकने वाली नहीं है, अगर मैं न आता तो तुम घर कैसे आती?"

अनिल की बात सुनकर देविका की आंखों में आंसू आ गए। मानो दिल के सारे गुबार आज निकल जाना चाहते हों। कितने दिनों से वो माही के चमकते हुए रिश्ते को देख कर मन में अनिल के लिए शिकायतें जमा कर रही थी। सच तो ये है कि जहां सच्चा प्यार होता है, वहां दिखावे के लिए कोई जगह नहीं रह जाती।








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