छत्तीसगढ़ के मजदूर
आंदोलन:
छत्तीसगढ़ में जितने भी मजदूर आंदोलन हुए है उसमें ठाकुर प्यारेलाल सिंह का सबसे बड़ी भुमिका रही हैं।
और उनके सहयोगी के रुप में शिवलाल मास्टर, शंकर खरे का महत्त्वपूर्ण योगदान रहा है।
√प्रथम(बी एन सी मिल) मजदुर
आंदोलन 1920:
यह आंदोलन राजनांदगांव रियासत में हुआ था।
(बी एन सी का अर्थ बंगाल नागपुर क्वार्टन मिल है)
√कारण क्या था:
•मजदूरों के ऊपर अत्याचार किया जाता था।
• मजदूरों के कार्य करने का समय बहुत ज्यादा था, 12-13
घंटे काम कराया जाता था।
•वेतन बहुत ही कम था, पुरूषों को 2 आना और महिलाओं डेर आना दिया जाता था।
•बहुत ज्यादा अनियमितता था मिल में मालिकों के व्यवहार में।
ये आन्दोलन 36 दिनों तक चला, और भारत का सबसे लंबा चलने वाला प्रथम आन्दोलन था।
√आंदोलन का परिणाम:
इस आन्दोलन को राष्ट्रीय नेता वी वी गिरी का साथ मिला था इसलिए आन्दोलन और सफल बन गया।
मजदूरों की मांग स्वीकार किया गया, मजदूरी का समय 8 घंटा निर्धारित किया गया।
लेकीन नेतृत्व कर्ता ठाकुर प्यारेलाल सिंह को राजनांदगांव रियासत से निष्कासित कर दिया गया।
✓ द्वितीय मजदुर आंदोलन
(1924):
यह आंदोलन भी राजनांदगांव रियासत में हुआ था, बी एन सी मिल में।
कारण:
मिल मालिकों के दमनकारी नीतियों के विरुद्ध यह आन्दोलन किया गया था।
विशेष
•जब जातीय भोग हो रहा था तो ब्रिटिश सिपाही के द्वारा खाने के बर्तन को ठोकर (पैर)से मार दिया गयाऔर इस परिस्थिति को देखते हुए एक मजदुर ने भ्रष्ट बाबू गंगाधर राव को थपड़ जड़ दिया।
•पारिस्थिती का फायदा उठाते हुए पुलिस ने मजदूरों पर आक्रमण कर दिया।
•13मजदूरों को पुलिस ने हिरासत में ले लिया, स्थिति नियंत्रण में न देख कर पुलिस ने मजदूरों पर गोली चला दिया। जिसमे 1 मजदुर की मौत हो गई और 12मजदुर घायल हो गए।
इस आन्दोलन में भी ठाकुर प्यारेलाल सिंह का जुड़ाव था, लेकीन वो रियासत से निष्कासित चल रहे थे।
√आन्दोलन का परिणाम:
इस आन्दोलन का कोई निष्कर्ष नहीं निकला या फिर यह आंदोलन एक तरह से असफल रहा था।
✓तृतीय मजदुर आंदोलन
(1937):
ये अंदोलन भी राजनांदगांव के बी एस सी मिल में हुआ।
कारण:
ठाकर प्यारेलाल सिंह अभी राजनांदगांव रियासत से निस्काशित चल रहें थे, तो इस बात का फायदा उठाकर मिल मालिकों ने वापस से मजदूरों पर जुल्म करना सुरु कर दिया।
मजदूरों की वेतन में 10% कटौती कर दिया गया इस वजह से मजदूरों ने आंदोलन किया।
विशेष:
ठाकुर प्यारेलाल सिंह अभी राजनांदगांव रियासत से निस्काशित चल रहें थे, लेकिन उन्होंने राजनांदगांव रेलवे स्टेशन के विस्राम गृह में रह कर इस आन्दोलन का नेतृत्व किया।
( रेलवे स्टेशन किसी रियासत के अंतर्गत नहीं आता था, वो तो केंद्रीय प्रशासन का हिस्सा माना जाता था)
ठाकुर प्यारेलाल सिंह ने मिल मालिकों और मिल अधिकारियों को बहुत सारी प्रस्ताव भेजा ।
बीच में प्रतिनिधि के रुप में दोनों के बीच समझौता कराने का कार्य श्री रूईकर ने किया।
आन्दोलन का परिणाम:
•कई दिनों तक मिल बंद रहीं, लेकीन बाद मे एक और प्रस्ताव भेजा जाने के बाद स्वीकार कर लिया गया।
•कुछ समय के लिए और लगभग 4लाख रू का नुकसान हुआ मजदूरों को।
•बाद में मजदूरों में राष्ट्रीयता की भावना जागृत करने के लिए श्री रूईकर के द्वारा 1अगस्त1938 को नांदगांव स्टेट कांग्रेस की स्थापना किया गया।
@BNC मिल के बारे में
महत्त्वपूर्ण जानकारी:
सर्व प्रथम मिल की स्थापना सी पी मिल के नाम से, मैकवेथ ब्रदर्स द्वारा राजनांदगांव रियासत के राजा बलरामदास के सहयोग से किया गया था। बलरामदास ही इस मिल के अध्यक्ष भी बनाए गए थे। लेकिन यह मिल न चलने की वजह से इसे बेच दिया गया जिसे 1897 में कलकत्ता के कंपनी सावलिंग ने वापस खरीद लाया। तब से इसका नाम BNC मिल हो गया।




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