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छत्तीसगढ़ में राजनैतिक जागरण/राष्ट्रीय आंदोलन/राष्ट्रीय चेतना


  छत्तीसगढ़ में राजनैतिक                    जागरण

       आइए दोस्तों हम छत्तीसगढ़ में हुवे विभिन्न प्रकार के     राष्ट्रीय आंदोलन या राष्ट्रीय चेतना के बारे में जानते हैं

इसके लिए छत्तीसगढ़ के विभिन्न स्थान में विभिन्न प्रकार की समितियां बनाई गई थी जिसमें से निम्नलिखित है

✓रायपुर में:

छत्तीसगढ़ के रायपुर में अलग अलग समिति और संस्थान का निर्माण कराया गया।

•वैज्ञानिक तथा साहित्यिक समिति(1870)
• मालिनी रीडिंग क्लब( 1899)
• बाल समाज 
•कवि समाज(1899 राजिम में)
•लोक शिक्षण संस्थान।

✓बिलासपुर में :

बिलासपुर के विभिन्न स्थल में सभा और इंस्टीट्यूट का निर्माण हुआ

•बुद्धि प्रकाश सभा
• रीडिंग क्लब 
•बंगाल नागपुर रेलवे इंस्टीट्यूट

कांग्रेस का गठन ( 1885 ):

A.O ह्यूम और डफरिन ( भारत के वायसराय) ने मिलकर कॉन्ग्रेस का गठन किया था। ब्रिटिश शासन के अंतर्गत आता था कांग्रेस ,इन्होंने ब्रिटिश तथा  भारतीय जनता के बीच सुझाव या सुलह कार्य के लिए कांग्रेस की स्थापना किया था ।जिसमें भारतीय सदस्य ही थे, लेकिन कांग्रेस राष्ट्रीय प्रचार में लग गया राजनीतिक चेतना का विकास करना इनका उद्देश्य बन गया

# गोकुलदास तेजपाल संस्कृत कॉलेज

 मुंबई :

इस अधिवेशन की अध्यक्षता (प्रथम अधिवेशन की अध्यक्षता) व्योमेस चंद्र बनर्जी ने किया था ।इस अधिवेशन में 72 प्रतिनिधि शामिल थे।

@1889 कॉन्ग्रेस का बंबई अधिवेशन

इस अधिवेशन में छत्तीसगढ़ से माधवराव सप्रे , वामन राव लाखे, रामदयाल तिवारी और सी एम ठक्कर शामिल हुए।

इस अधिवेशन की अध्यक्षता विलियम वेडर बर्न ने किया था।

@1891 कांग्रेस का नागपूर अधिवेशन 

इस अधिवेशन की अध्यक्षता पी आनंदा चार्लू ने किया था ।

इसमें छत्तीसगढ़ से माधवराव सप्रे , वामन राव लाखे, रामदयाल तिवारी, सी एम ठक्कर , और बद्रीनाथ साहू शमिल हुए थे।

 कॉन्ग्रेस का विभिन्न प्रांतीय

 सम्मेलन


•1905 कॉन्ग्रेस का प्रथम प्रांतिया

 राजनैतिक परिषद

सम्मेलन (नागपुर):

इस सम्मेलन के दौरान पूरे भारत में बंग भंग का दौर चल रहा था इसी समय छत्तीसगढ में भी बंग भंग आन्दोलन का शुरुवात हुआ था।
              बिलासपुर में इस अंदोलन का नेतृत्व ताराचंद्र कर रहें थे। बिलासपुर जिला में राजनैतिक रुप से जागृत प्रथम व्यक्ति होने का श्रेय ताराचंद्र को दिया जाता है।

•1906 कॉन्ग्रेस का द्वितीय  प्रांतीय

 राजनैतिक परिषद 

सम्मेल(जबलपुर):

√ इस समय भारत में स्वदेशी आंदोलन चल रहा था। तो छत्तिसगढ़ से भी दादा साहब खपड़े का स्वदेशी आंदोलन विषयक प्रस्ताव स्वीकृत हुआ।

√ इसी वर्ष छत्तीसगढ़ के रायपुर में कांग्रेस की शाखा की स्थापना हुआ। इसके स्थापना में सी एम ठक्कर का महत्त्वपूर्ण भूमिका रही हैं।

√ पंडित सुंदर लाल शर्मा (छत्तीसगढ़ में राष्ट्रीय जागरण के प्रणेता) कांग्रेस में शामिल हुआ। इसी वर्ष समित्र मण्डल की स्थापना की।

@ 1906 कोंग्रेस का कलकता अधिवे

√  इस अधिवेशन में छत्तीसगढ़ से ई राघवेंद्र राव, कृपाराम मिश्र , पंडित लोचन प्रसाद पांडे, पंडित चिंतमनी पांडे और अनतराम पांडे शमील हुए थे।


√इस अधिवेशन की अध्यक्षता दादा भाई नौरोजी ने किया था 


@1907 कोंग्रेस का सूरत अधिवेशन :

इसअधिवेशन की अध्यक्षता रामबिहारी घोष ने किया था।

√छत्तीसगढ़ से पंडित सुंदर लाल शर्मा, डॉक्टर शिवराम मुंजे, नारायणराव मेघावले, ई राघवेंद्र राव सामिल हुए थे।

√ इस अधिवेशन के समय कोंग्रेस में फूट पड़ा कांग्रेस दो दलों में बंट गया: गरम दल, नरम दल।

1907 कॉन्ग्रेस का तृतीय प्रांतिया

 राजनैतिक परिषद

 सम्मेलन ( रायपुर):

√29 मार्च 1907 को छत्तीसगढ़ के रायपुर में कोंग्रस में फुट पडा था।

√ गरमदल: 
दादा साहब खपड़े, माधवराव सप्रे, पंडित रविशंकर शुक्ल, वामनरव लाखे, डॉक्टर शिवराम मुजे, लक्ष्मण राव उदगीरकर।

√नरमदल: 
डाक्टर हरिसिंह गौर, रायबहादुर, देवेद्रनाथचौधरी, सी एम ठक्कर, डॉक्टर मधोलकर केलकर।

√ 1907 में ही नांदगांव में प्रथम छात्र हड़ताल हुआ। जिनका नेतृत्व ठाकुर प्यारेलाल सिंह ने किया था।

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